चलते चलते राह पुरानी, वो आँखों का निर्मल पानी,
पतझड़ दर्द की एक निशानी, कि आंसू सुख गए|
समां रंगीन, बेजार हवाएं, पकी फसल, वो तूफां आये,
सूरज कहीं गगन खो जाए, रात अँधेरी, घनी घटायें,
बारिश कि वो भरी जवानी, कि आंसू सुख गए|
आशा भरी करते थे दुआए, सुबह शाम वो ख्वाब सजाएँ,
शीशे कि जंजीर उठायें, आँखों में फिर सजा फिजायें,
आगे ज्यों-ज्यों बढे काफिले, कि आंसू सुख गए|
वक़्त तो हैं ज्यू बहता पानी, आज यहाँ कल बना निशानी,
नहीं रुका था, नहीं रुकूंगा, नहीं थका था, नहीं थकूंगा,
आँखों कि बेबाक बयानी, कि आंसू सुख गए|
कुछ लिखना था, कुछ पढ़ना था, कुछ दिखाना था, कुछ कहना था,
कलम रुकी क्यूँ, न रुकना था, आँख उठी क्यों, यूँ रहना था,
दर्द बन गया हंसी ठहाका, कि आंसू सुख गए|
दर्द से रिश्ता है मेरा, गम के घूंट पिया करता हूँ, बांटता हूँ खुशीयाँ सबको, गम का सौदा किया करता हूँ|
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Friday, February 12, 2010
Sunday, October 11, 2009
कल भी चाहूँगा
एक तू थी जो हमारी एक बात भी न सह पाई,
एक हम है जो तेरे बिछोह का गम भी सह गए।
जमाना गुजरा तो लगा, कि सभी जख्म भर गए,
यादों कि एक आंधी आई, सब जख्म हरे हो गए।
याद आती थी,
रुलाती थी,
तडपाती थी,
पर हमने फिर भी हमने इस तन्हाई को वफ़ा माना,
तेरी जुदाई को मिलन माना।
हम तो अपनी वफ़ा के बारे में कुछ भी न कह पाए,
पर आप हमे ना जाने क्या क्या उपाधियाँ दे गए।
हर लम्हा मैं हारा,
हर लम्हा मैं रोया,
हर लम्हा मैंने दर्द लिया,
हर लम्हा मैंने जख्म लिया,
हर बार मैं कुछ ना कह पाया,
हर पल मैं तेरी यादों में खोया।
आज भी तेरी यादें हैं,
आज भी तेरी बातें हैं,
आज भी मेरी वफ़ा हैं,
आज भी तेरा दर्द हैं।
आज भी सरताज आपको मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा,
विष का घूँट भी खामोशी से पी जाऊंगा,
मरते हुए भी सनम आपको यही दुआ दे जाऊंगा,
ख़ाक में मिल कर भी, आपको आबाद देखना चाहूँगा।
फिर भी अगर ना हो यकीं अ जानेवफा,
जलने के बाद मेरी ख़ाक से आकर पूछ लेना.
तुम्हे यही जबाब मिलेगा,
मैं तुम्हे कल भी चाहता था,
आज भी चाहता हूँ,
और कल भी चाहूँगा।।
एक हम है जो तेरे बिछोह का गम भी सह गए।
जमाना गुजरा तो लगा, कि सभी जख्म भर गए,
यादों कि एक आंधी आई, सब जख्म हरे हो गए।
याद आती थी,
रुलाती थी,
तडपाती थी,
पर हमने फिर भी हमने इस तन्हाई को वफ़ा माना,
तेरी जुदाई को मिलन माना।
हम तो अपनी वफ़ा के बारे में कुछ भी न कह पाए,
पर आप हमे ना जाने क्या क्या उपाधियाँ दे गए।
हर लम्हा मैं हारा,
हर लम्हा मैं रोया,
हर लम्हा मैंने दर्द लिया,
हर लम्हा मैंने जख्म लिया,
हर बार मैं कुछ ना कह पाया,
हर पल मैं तेरी यादों में खोया।
आज भी तेरी यादें हैं,
आज भी तेरी बातें हैं,
आज भी मेरी वफ़ा हैं,
आज भी तेरा दर्द हैं।
आज भी सरताज आपको मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा,
विष का घूँट भी खामोशी से पी जाऊंगा,
मरते हुए भी सनम आपको यही दुआ दे जाऊंगा,
ख़ाक में मिल कर भी, आपको आबाद देखना चाहूँगा।
फिर भी अगर ना हो यकीं अ जानेवफा,
जलने के बाद मेरी ख़ाक से आकर पूछ लेना.
तुम्हे यही जबाब मिलेगा,
मैं तुम्हे कल भी चाहता था,
आज भी चाहता हूँ,
और कल भी चाहूँगा।।
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